.मनुष्य यात्री है जो स्वदेश की ओर जा रहा है
एक पिता और उसका बेटा लंबी पैदल यात्रा कर रहे थे । मार्ग के दोनों
किनारों पर चित्र जैसा मनोरम और ह्रदयस्पर्शी दृश्य नजर आया तो उनकी आंखे भर आई
,जिससे लंबी यात्रा की थकन दूर हो गई
सुन्दर प्राकृतिक दृश्य पर मोहित हो जाकर भेटे ने आगे जाना नही चाहा ,
और वह अपने पिता को वहां पड़ाव डाल कर ठहराने की बात कहकर अनुरोध करने लगा । बेटे
के अनुरोध से पीट ने उसे सिर्फ कुछ दिनों तक आराम करने के लिए कहा ।यह सुनते ही
बेटे का दिल बहुत बहल गया , और वह सिर्फ पड़ाव नहीं , पर पेड़ों को कट कर बड भी लगा
रहा था । यह देखकर पिता ने बेटे को कहा ,
“बेटा ,ऐसा करने की आवश्कता
नहीं है । क्योंकि दो या तीन दिनों के बाद हम इस जगह को छोड़ कर घर वापस चले जाएँगे
। इस जगह से ज्यादा मोहित न होना ।”
यह सुनने के बाद भी , बेटे ने पिता की बात पर ध्यान नहीं दिया , और
मुजबूत पेड़ कट कर चारो ओर बड बनाई और फूल लगते हुए इसे सजाने में पूरा मन लगाया ,
मनो वह हमेशा के लिए वहा रहेगा ।
ऊपर की कहानी में पिता बेटे के जैसे जो यात्रा कर रहे
थे , हम भी इस धरती पर अजनभी की तरह यात्रा कर रहे है । हमारी यात्रा का अनंत घर
स्वर्ग है ।
यद्यपि पिता अनंत स्वर्ग की ओर हमारी अगुवाई कर रहे है और वचन के द्वारा हमेशा स्वर्ग की यद दिला रहे है ताकि हम अपना घर स्वर्ग न भूले , तो भी हम संतान बहुत बार स्वर्ग को भूल जाते है । हो सकता है कि हम भी उस बेटे की तरह हो , जिसने मनमोहक दृश में मन टिका कर , यात्रा के बिच में घर सजाने और सुन्दर बगीचा बनाने में मन लगाया और परमेश्वर की आवाज़ को उनसुना किया ,और हो सकता है कि हम निकट आ रहे परमेश्वर के राज्य से आधिक इस धरती पर मन लगा रहे हो न भूले , तो भी हम संतान बहुत बार स्वर्ग को भूल जाते है । हो सकता है कि हम भी उस बेटे की तरह हो , जिसने मनमोहक दृश में मन टिका कर , यात्रा के बिच में घर सजाने और सुन्दर बगीचा बनाने में मन लगाया और परमेश्वर की आवाज़ को उनसुना किया ,और हो सकता है कि हम निकट आ रहे परमेश्वर के राज्य से आधिक इस धरती पर मन लगा रहे हो
यद्यपि पिता अनंत स्वर्ग की ओर हमारी अगुवाई कर रहे है और वचन के द्वारा हमेशा स्वर्ग की यद दिला रहे है ताकि हम अपना घर स्वर्ग न भूले , तो भी हम संतान बहुत बार स्वर्ग को भूल जाते है । हो सकता है कि हम भी उस बेटे की तरह हो , जिसने मनमोहक दृश में मन टिका कर , यात्रा के बिच में घर सजाने और सुन्दर बगीचा बनाने में मन लगाया और परमेश्वर की आवाज़ को उनसुना किया ,और हो सकता है कि हम निकट आ रहे परमेश्वर के राज्य से आधिक इस धरती पर मन लगा रहे हो न भूले , तो भी हम संतान बहुत बार स्वर्ग को भूल जाते है । हो सकता है कि हम भी उस बेटे की तरह हो , जिसने मनमोहक दृश में मन टिका कर , यात्रा के बिच में घर सजाने और सुन्दर बगीचा बनाने में मन लगाया और परमेश्वर की आवाज़ को उनसुना किया ,और हो सकता है कि हम निकट आ रहे परमेश्वर के राज्य से आधिक इस धरती पर मन लगा रहे हो


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